अब जिले की वनवासी महिलाएं सोलर कुकर में बनाएंगी खाना

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फाइल फोटो

न धुआं का झंझट, न आग लगने का डर. जिले के कैमूर पहाड़ी पर बसे नक्सल प्रभावित रेहल की महिलाएं जल्द ही स्थानीय संसाधनों से तैयार ऊर्जा से खाना पकाएंगी. रोहतास जिले का यह पहला गांव होगा, जहां सभी घरों में बायोगैस से चुल्हे जलेंगे. साथ ही सोलर कूकर से सभी घरों में खाना बनेगा. जिससे हादसे का भी भय नहीं रहेगा. सोलर कूकर उपलब्ध कराने की जवाबदेही बिहार अक्षय उर्जा विकास एजेंसी (ब्रेडा) को दिया गया है. सौर ऊर्जा चालित इस कुकर से जल्दी खाना बन जाएगा. जिसे लोगों को 2500 से 4000 रुपये में दिया जाएगा. रियों

सोलर कूकर से लाभ :-

– रसोई गैस, केरोसिन, विधुतीय ऊर्जा, कोयले व लकड़ी की कोई आवश्यकता नहीं होती.

– ईंधन पर कोई खर्च करने की आवश्यकता नहीं है. सौर ऊर्जा मुफ्त उपलब्ध होती है.

– सोलर कूकर में पका हुआ खाना पोषक होता है. इसमें प्रोटीन व विटामिन को बनाए रखने की क्षमता 20 से 30 फीसद अधिक होती है. जबकि विटामिन ए पांच से 10 फीसद तक अधिक रहता है.

– सोलर रसोई प्रदूषण मुक्त व सुरक्षित होती है.

– सोलर कूकर के साइज का घर में सदस्यों की संख्या के आधार पर चयन किया जा सकता है.

– सरकार द्वारा सोलर कूकर की खरीद पर सब्सिडी की योजनाएं भी हैं.

– पकाने के लिये सही मात्र में सूर्य का प्रकाश होना आवश्यक है.

भोजन ऐसे बनाएं:- सोलर कूकर को खुले में रखें. भोजन के बर्तन इसमें रखने से पहले इसे कम से कम 45 मिनट तक सूर्य प्रकाश में रखें. इस तरीके से कुकर भोजन पकाने की क्रिया के लिए तैयार हो जाता है, और पकाने में समय कम लगता है.

रोहतास डीएम अनिमेष कुमार पराशर कहते है कि, सोलर कूकर मुख्य रूप से सौर ऊर्जा आधारित भोजन पकाने का उपकरण है. यह पुर्णत: धुआ रहित व्यवस्था है, जिसमें न तो ईंधन की जरूरत होती है न गैस की. जिस कारण आग लगने की संभावना नहीं रहती है. केवल सूर्य की ऊर्जा का उपयोग किया जाता है. कैमूर पहाड़ी पर बसे रेहल गांव में प्रयोग के तौर पर सोलर कूकर सिस्टम का उपयोग फिलहाल किया जा रहा है. यदि पूरी तरह से व्यवस्था सफल रही, तो पहाड़ी पर बसे अन्य गांवों में इसे विस्तारित किया जाएगा. सोलर कूकर उपलब्ध कराने की जवाबदेही ब्रेडा को दी गई है.

 

रिपोर्ट- दैनिक जागरण

 

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