डिहरी-सोननगर रेल पुल बना भारतीय रेल का गौरव, एक साथ तीन रेल का परिचालन करने वाला देश का इकलौता रेल पुल

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डेहरी-सोननगर रेल पुल

डेहरी-ऑन-सोन और सोननगर के रूट रिले इंटरलाॅकिंग कार्य पूर्ण होते ही तिहरी ब्रांड गेंज रेल लाईन वाला तीन किलोमीटर लम्बा पुल भारतीय रेल के लिए गौरव बन गया. सम्पूर्ण भारतीय रेल में संभवतः इकलौता ऐसा पुल है जिस पर एक साथ तीन ट्रेन या छः लांग हॉल मालगाड़ी ट्रेनों का परिचालन एक साथ किया जा रहा है. दिल्ली-कोलकाता रेलखंड पर डेहरी-सोननगर ब्रिज देश के कोयले परिवहन हेतू सबसे व्यस्ततम ग्रैंड कॉर्ड लिंक है. इस रेल पुल पर प्रतिदिन तकरीबन सवा दो सौ मेल, पैसेंजर तथा मालगाड़ीयों का परिचालन होता है और लगभग हर दस मिनट में एक ट्रेन इस रेल पुल से गुजरती है.

बता दें कि इस नए रेल पुल के समांतर 10052 हजार फीट लम्बे पुराने रेल पुल का निर्माण आयरन गिरडर्स व बड़े-बड़े पत्थरों से हुआ था. उस समय स्विट्जरलैंड की टे-बिरीज की लम्बाई 10527 के बाद विश्व के सबसे लम्बे रेल पुलों में इसकी गिनती होती है. 93 खंभे वाले इस रेल पुल में एक खंभे से दूसरे खंभे की कुल दूरी 33 मीटर है. इस पुराने रेल पुल का निर्माण कार्य 1897 में चालू हो गया था और 27 फरवरी सन 1900 में इस पर ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दी गई थी. जबकि आज पुनः 119 साल बाद नया रेल पुल भारतीयों के लिए गौरव का विषय बना है.

डेहरी-सोननगर रेल पुल

वहीं इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मूर्त रूप देने के बाद मुगलसराय मंडल और पूर्व मध्य रेल हाजीपुर के कई इंजीनियर और अधिकारियों का एक टीम आज ड्रोन से सर्वेक्षण किया और इसकी सूचना रेल मंत्रालय एवं बोर्ड को भेज दिया. इस सफलता से प्रफुल्लित मुगलसराय मंडल के वरीय संकेत एवं दूरसंचार अभियंता(समन्वय) एवं इस रूट रिले इंटरलाॅकिंग कार्य डेहरी-सोननगर के नोडल पदाधिकारी रहे ब्रजेश कुमार यादव ने इसे पूर्व मध्य रेल की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि परिचालन तथा यात्रियों की सुरक्षा में लगातार उत्तरोत्तर सुधार हो रहा है तथा हम दिन प्रतिदिन विकास के नये-नये आयाम स्थापित कर रहे हैं. इसके लिए कर्मचारियों का कार्य के प्रति सजगता एंव उत्कृष्ट प्रदर्शन ही मुख्य रूप से कामयाब होने में मददगार साबित हुआ.

डेहरी-सोननगर रेल पुल

एक अन्य सवाल पर श्री यादव ने कहा अब रेल बिलंब और गति की समस्याओं से हमें निजात पाने में सहायता मिलेगी और इसका सीधा लाभ यात्रियों को होने वाले हैं. क्योंकि अरबों रुपए के लागत खर्च करने के बाद तैयार इस थर्ड लाईन को हजारों की संख्या में कुशल एवं अद्ध कुशल कर्मचारियों ने जिस तरह से दिन रात एक कर कार्य को अंजाम दिया, वह काबिले तारीफ है. हालांकि इस पर खर्च राशि एक अनुमान के अनुसार एक साल में ही वसूल हो जाएगी.

रिपोर्ट- मिथलेश कुमार

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