बिहार में एक ऐसी ‘महापरीक्षा’ जिसके बारे में हर रिश्तेदार को पता होता है

जी हाँ! बिहार में एक ऐसी महापरीक्षा होती है, जिसके बार में परीक्षार्थी से जुड़े हर रिश्तेदार और गाँववासी को पता होता है. वो महापरीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित ‘मैट्रिक की महापरीक्षा’ है. लगभग एक सप्ताह तक चलने वाली बिहार की यह महापरीक्षा हर साल होली के कुछ दिन पहले/बाद होती है. इस साल ये महापरीक्षा 21 फरवरी को शुरू हो रही है, जो 28 फरवरी तक चलेगी. जिसमें लगभग 17.68 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे.

फाइल फोटो

आपको बता दें कि बिहार बोर्ड के इस महापरीक्षा की खास बात ये है:

परिवार के हर रिस्तेदार को पता होता है कि हमारे किस रिस्तेदार के यहां कौन मैट्रिक की परीक्षा दे रहा है.

गाँव के परीक्षार्थी जिनका सेंटर शहर में है, उनको शहर के हर रिस्तेदार के यहां से पहले ही फोन आ जाता है की बबुआ को हमारे यहां ही रुकना है यहाँ से सेंटर नजदीक परेगा.

जिनका कोई रिस्तेदार शहर में नहीं होगा वो सब पहले से ही मिल के एक गाड़ी भाड़ा पर कर लेते हैं ताकि आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हो.

परीक्षार्थी के खाने-पीने का भी विशेष ध्यान दिया जाता है, वैसे भोजन जिससे पेट ख़राब होने का खतरा होता है, वो खाना वर्जित रहता है.

एक सप्ताह तक चलने वाली इस महापरीक्षा के बीच-बीच में परीक्षार्थी के सभी रिस्तेदार उससे मिलने के लिए सेंटर पर आएंगे. जो साथ में  अंगूर, सेव अथवा अन्य खाने-पीने की वस्तु लेकर आते है. ऐसा न करने पर रिस्तेदारों की किरकिरी होती है.

परीक्षा ख़त्म होने पर शाम में परीक्षार्थी को समोसा, मिठाई इत्यादि खिलाया जाता है.

परीक्षार्थी के पास कम से कम 3-4 कलम होना चाहिए.

परीक्षार्थी के लिए नया कपड़ा ख़रीदा जाता है.

परीक्षार्थी जिस टीचर से ट्युसन पढ़ा है वो टीचर भी एक दिन सेंटर पर जरूर आएगा, लास्ट मोमेंट में कुछ दिव्य ज्ञान देने के लिए.

परीक्षा सेंटर के अगल-बगल में ढेरो खाने-पीने की दुकाने खुल जाएँगी.

परीक्षा के दिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बिलकुल अस्त-व्यस्त रहेंगी.

परीक्षा के अंतिम दिन हर परीक्षार्थी नजदीक के दर्शनीय स्थल या सिनेमा घरो में सिनेमा देखने जायेंगे और इसी के साथ ये महापरीक्षा सम्पन हो जाता है.

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