रोहतास का यह गांव कभी नक्सली हिंसा से था परेशान आज है देशभर में मशहूर

एक वक्त था जब रोहतास जिले के कैमूर पहाड़ी पर स्थित गाँव रेहल की चर्चा नक्सलवाद की वजह से होती थी. वक्त के बदलाव के साथ रेहल गाँव सुर्खियों में है. दरअसल जिला प्रशासन ने 1700 फीट की ऊंचाई पर बसे रेहल गाँव में विद्यालय, बिजली, पानी, मोबाइल टावर, बैंक और स्वास्थ्य केंद्र जैसी आधुनिक सुखसुविधा पहुंचाकर इसे फिर से चर्चा में ला दिया है. इस पहल की सबसे अनोखी बात यह है कि इन सब चीजों के लिए बिजली किसी बिजलीघर से नहीं बल्कि सौर ऊर्जा से चलने वाले प्लांट से पैदा की जाती है. इसी आधार पर गांव को कार्बन निगेटिव गांव का भी दर्जा मिला है. जिला प्रशासन इस इलाके के बाकी गांवों को भी रेहल की तरह विकसित करने का मन बना चुकी है.

यहाँ आपको बता दें कि कार्बन निगेटिव मतलब इस गांव की रोजमर्रा की गतिविधियों से जितनी कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस निकलती है उससे ज्यादा उसके आसपास मौजूद पेड़-पौधे सोख लेते हैं. यह तभी हो सकता है जब या तो आप अपने आस-पास हरियाली बढ़ा लें या कार्बन-डाई-ऑक्साइड निकालने वाले ईंधन का कम से कम इस्तेमाल करें. रेहल गाँव तो पहले से ही जंगल के बीच बसा था इसलिए उसे अपने ईंधन का स्रोत बदलना था. रेहल में भी बाकी गांवों की तरह गोबर और लकड़ियों का इस्तेमाल होता था लेकिन अब उनकी जगह सोलर एनर्जी का प्रयोग करने पर कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा अपने आप कम हो गई. कार्बन-डाई-ऑक्साइड ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार गैसों में प्रमुख है.

 

रेहल गाँव में लगे सोलर प्लेट

मालूम हो कि, 16 साल पहले इसी गांव में रोहतास वन प्रमंडल के अधिकारी डीएफओ संजय सिंह की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी. नक्सलियों का सक्रिय क्षेत्र होने के कारण यह इलाका रेड कॉरीडोर के नाम से मशहूर हुआ करता था, यहां अधिकारी चुनाव तक कराने में डरा करते थे. लेकिन अब तस्वीर बदल गयी है. अब आलम है कि लोग इस गांव के विकास की बातें करते नहीं थक रहे हैं. जिस गांव तक पहुंचने के लिए एक पक्की सड़क भी नहीं थी आज वहां दस किलो वॉट एम्पियर का एक सोलर पावर प्लांट है, जबकि एक दस किलो वॉट एम्पियर और एक पच्चीस किलो वॉट एम्पियर के सोलर पावर प्लांट पर काम चल रहा है. इस सोलर प्लांट से मिलने वाली बिजली से एक समय पर ही तीन बल्ब व एक पंखा चलाया जा सकता है. फिलहाल गांव में बैंक, पुलिस स्टेशन, स्वास्थ्य केंद्र, मोबाईल टॉवर और वॉटर सप्लाई जैसे सभी केन्द्रों को सोलर एनर्जी से बिजली दी जा रही है. 3160 की जनसंख्या वाले इस गांव के 162 घरों को भी इसी बिजली से रौशन किया गया है. गाँव के सभी घरों में शौचालय, बायोगैस व पक्की नालियां भी बनी हैं.

रेहल के ग्रामीणों से बातचीत करते जिलाधिकारी

बता दें कि रेहल को कार्बन निगेटिव बनाने का आइडिया भूटान से आया है. जो कि बिहार के लिए पहला प्रयोग है. दरअसल पूरी दुनिया में भूटान ही एक कार्बन निगेटिव देश है. जहाँ का 72% भूभाग जंगलों से ढका हुआ है. वहां इतने पेड़ हैं जो 6 मिलियन टन कार्बन डाई ऑक्साइड सोख सकते हैं जबकि भूटान का कार्बन-डाई ऑक्साइड-उत्सर्जन 2.2 मिलियन टन है.

वही रोहतास जिला पदाधिकारी अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि, रेहल के स्कूल में एमडीएम के लिए सामुदायिक सौर रसोईघर बनाने की योजना है. सभी घरों में सामुदायिक बायोगैस संयंत्र के माध्यम से गैस की आपूर्ति की जाएगी. साथ ही पवन चक्की भी स्थापित की जा रही जिससे गाँव के स्ट्रीट लाइट को बिजली मिलेगी. यह गांव अपने आप में अद्वितीय होगा, जहाँ ऊर्जा की गैर पारंपरिक स्रोतों के माध्यम से गाँव के सभी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जाएगा.

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