औषधीय खेती कर किस्मत संवारने में जुटे युवा किसान

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सूर्यपुरा के गोशलडीह गांव के एक युवा किसान ने औषधीय खेती करके न सिर्फ अपने भाग्य को संवार रहा है बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा श्रोत बन गया है  गोशलडीह पंचायत में जापानी पुदीना की खेती कई साल से हो रही है। युवा किसान प्रविन्द कुमार सिंह ने वर्ष 2002 में मैट्रिक की परीक्षा पास करके वह लगातार पढ़ाई करता रहा।

उसके मन में उच्ची शिक्षा प्राप्त कर किसी अच्छे ओहदे पदस्थापित होने का लक्ष्य था। वर्ष 2012 में प्रविन्द ने अमरावती यूनिवर्सिटी से बीपीएड की डिग्री हासिल कर नौकरी की तलाश में लगा। अंत में किसानी को ही अपना भविष्य मानकर कृषि विज्ञान केंद्र बिक्रमगंज से औषधीय खेती व मशरूम की खेती करने का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया।

 

कृषि वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार एवं डॉ. रीता सिंह की देखरेख में उसने मेंथा की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिकों की देखरेख में हुई खेती से प्रविन्द को अच्छा लाभ मिला है। यह देखकर दूसरे किसान भी काफी प्रभावित हुए। इस साल भी प्रविन्द ने दो एकड़ भूमि में मेंथा की खेती की है।

युवा कृषक प्रविन्द कुमार ने बताया कि अब वह पूरी तरह से खेती पर ही आश्रित हो चुका है। खरीफ और रबी फसल के अलावा प्रविन्द औषधीय खेती भी कर रहा है। कृषि पदाधिकारी नंदजी राम का कहना है कि उन्नत खेती से संबंधित क्षेत्र के किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। समय-समय पर अनुदानित दर पर बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

रिपोर्ट- वीरेन्द्र कुमार शर्मा

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