पूर्वमध्य रेलवे मुख्यालय हाजीपुर सहित मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर स्टेशन की शोभा बढ़ा रहा रोहतास इंडस्ट्रीज का लोकोमोटिव

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कभी डेहरी रोहतास लाइट रेलवे की मातृ कंपनी रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपनी सेवाएं देने वाला लोकोमोटिव अब पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय हाजीपुर के मुख्य भवन रेल निकेतन के सामने बने पार्क सहित, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के बाहर शान से विराजमान है. ये लोकोमोटिव आते-जाते लोगों को स्टीम इंजन (भाप से चलने वाले) दौर की याद दिलाता है. जो लोग सन 2000 के बाद पैदा हुए हैं उन्होंने भारतीय रेलवे में स्टीम इंजन नहीं देखा होगा. क्योंकि आजकल ट्रैक पर डीजल या बिजली से संचालित इंजन ही दौड़ते हैं. वे इसे देखकर स्टीम इंजन के दौर को जान सकते हैं. कभी सिटी बजाता धुआं उड़ाया ये लोकोमोटिव अब शांत खड़ा है. पर मौन रहकर आपको इतिहास में ले जाता है. 

मालूम हो कि हाजीपुर में पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय है. यह एक नया जोन है. शहर के रामाशीष चौक पर इसका मुख्यालय बना है. मुख्यालय के अंदर दो स्टीम लोकोमोटिव को लोगों के दर्शन के लिए लगाया गया है. लेकिन मुश्किल है कि इन लोकोमोटिव के साथ इनका कोई परिचय नहीं लिखा गया है. परिचय लिखे रहने से रेलवे का इतिहास समझने में जिज्ञासु लोगों को आसानी होती है. पूर्व मध्य रेलवे 1996 में जोन बना, अब इसका मुख्यालय भवन शानदार बन गया है. पुरानी बिल्डिंग और नई बिल्डिंग के बीच में एक सुंदर पार्क भी बन गया है.

हाजीपुर मुख्यालय परिसर में रोहतास इंडस्ट्रीज का लोकोमोटिव

हाजीपुर मुख्यालय परिसर में पूर्व मध्य रेलवे के मुख्यालय में एक और रेलवे इंजन लोकोमोटिव देखने को मिलता है. वह काफी अच्छे हाल में दिखाई देता है. जो ‘जंग 12796 स्टीम लोकोमोटिव’ है. यह ब्राडगेज का स्टीम लोकोमोटिव है जिसे डालमियानगर स्थित रोहतास इंडस्ट्रीज के ब्राडगेज शेड से यहां लाकर स्थापित किया गया है. जंग 12796 जर्मनी में 1957 का बना हुआ स्टीम लोकोमोटिव है. यह पहियों के लिहाज से 0-6-0टी श्रेणी का है. वैसे तो डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे एक नैरोगेज रेलवे सिस्टम था, पर रोहतास इंडस्ट्रीज के पास ब्राडगेज का भी शेड था. इन लोकोमोटिव का इस्तेमाल रोहतास इंडस्ट्रीज के डालमियानगर स्थित कारखाने से डेहरी-ऑन-सोन रेलवे स्टेशन तक मालगाड़ी के डिब्बों को खींचने के लिए होता था. साल 2008 में रोहतास इंडस्ट्रीज का सारा स्क्रैप भारतीय रेलवे ने खरीद लिया था. उसके बाद इस लोकोमोटिव को हाजीपुर लाकर स्थापित किया गया है.

मुजफ्फरपुर स्टेशन के बाहर स्थापित रोहतास इंडस्ट्रीज का लोकोमोटिव

रोहतास इंडस्ट्रीज का एक लोकोमोटिव मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर भी स्थापित किया गया है. रोहतास इंडस्ट्रीज के पास कुल सात ब्राडगेज स्टीम लोकोमोटिव थे जिसमें 4 जंग कंपनी द्वारा निर्मित थे. रोहतास इंडस्ट्रीज के बंद हो जाने के बाद भी जंग द्वारा निर्मित 4 में से तीन लोकोमोटिव बहुत अच्छे हाल में थे. आरआईएल 06 नामक ये लोकोमोटिव ब्राडगेज ट्रैक (फीट ईंच) का है जो रोहतास इंडस्ट्रीज को 1967 से 1984 तक अपनी सेवाएं देता रहा.

जब 1984 में रोहतास इंडस्ट्रीज पूरी तरह बंद हो गई तब से ये डालमियानगर के बीजी शेड में कबाड़ की तरह ही पड़ा था. लेकिन इसके पहले यह 1967 से 1983 तक रोहतास इंडस्ट्रीज को अपनी सेवाएं देता रहा. इस लोकोमोटिव का निर्माण ब्रिटेन के लंकाशायर की कंपनी वालकन फाउंड्री ने 1908 में किया था. वालकन से ईस्ट इंडियन रेलवे ने कुल 10 लोकोमोटिव एक साथ खरीदे थे. यह पहियों के लिहाज से 0-6-4 टैंक मॉडल का स्टीम लोकोमोटिव है. इसने छह दशक तक ईस्ट इंडियन रेलवे को अपनी शानदार सेवाएं दीं. हाजीपुर में इन दिनों प्रदर्शित जंग 12796 भी काफी अच्छे हाल में नजर आता है.

समस्तीपुर स्टेशन के बाहर स्थापित रोहतास इंडस्ट्रीज का लोकोमोटिव

जर्मनी की कंपनी जंगेनथाल द्वारा निर्मित यह लोकोमोटिव स्टीम के बेहतरीन लोकोमोटिव में शुमार है. जंगेनथाल ने 1885 में स्टीम इंजन का निर्माण आरंभ किया था. 1913 में कंपनी का नाम एर्नाल्ड जंगेनथाल लोकोमोटिव रखा गया. 1976 में इस कंपनी ने लोकोमोटिव का निर्माण बंद कर दिया. रोहतास इंडस्ट्रीज से ही लिए गए जंग के दूसरे लोकोमोटिव जंग 12797 को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के बाहर संरक्षित कर प्रदर्शित किया गया है. रोहतास इंडस्ट्रीज ने संभवतः अपने अच्छे दिनों में इन लोकोमोटिव को अपनी जरूरतों के लिए खरीदा था. हालांकि कंपनी ने ज्यादातर लोकोमोटिव सेकेंड हैंड खरीदे थे लेकिन जंग के लोकोमोटिव को नया खरीदा प्रतीत होता है.

फाइल फोटो: जब रोहतास इंडस्ट्रीज में लोकोमोटिव चला करती थी

कहते हैं लोहा कभी पुराना नहीं होताअगर आप उसकी देखभाल करते रहें. इसलिए 60 साल पुराने लोकोमोटिव को रोहतास इंडस्ट्रीज ने अपने औद्योगिक इस्तेमाल के लिए खरीद लिया था. भले रोहतास इंडस्ट्रीज का कारोबार डालमियानगर में बंद हो गया और डेहरी-रोहतास रेलवे भी बंद हो गया, पर ये लोकोमोटिव अभी चालू हालत में थें. पर कई दशक तक शेड में पड़े-पड़े ये कबाड़ में तब्दील होने लगे थे. बाद में ये सारा स्क्रैप रेलवे ने खरीद लिया.

तो तकरीबन दो कंपनियों में आठ दशक तक धुआं उड़ाते हुए सफर करने वाला लोकोमोटिव अब पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय हाजीपुर के मुख्य भवन रेल निकेतन के सामने बने पार्क में, मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन और समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के बाहर लोगों के बीच कौतूहल बन कर खड़ा है.

सहयोग- daanapaani

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