सासाराम की गलियों से निकलकर मुंबई में छा गए थे ‘डॉ. हंसराज हाथी’, तारक मेहता का उल्टा चश्मा से मिली पहचान

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मशहूर टीवी सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में डॉक्टर हंसराज हाथी का किरदार निभाने वाले कवि कुमार आजाद का आज निधन हो गया है. उन्होंने वोकहार्ट अस्पताल में अंतिम सांस ली. दिल का दौरा पड़ने के चलते उनकी मौत हुई है. अपनी एक्टिंग से लोगों के चहरे पर मुस्कान लाने वाले कवि कुमार आजाद मूलरूप से बिहार के सासाराम स्थित गौरक्षणी के रहने वाले थे.

कवि कुमार आजाद  को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. जब वे युवा हुए तो उनका शरीर बेढब तरीके से बढ़ने लगा. इसके बाद भी उन्होंने एक्टिंग के शौक को मरने नहीं दिया. एक्टिंग के साथ ही कवि कुमार को कविताएं लिखने का भी शौक था.

नामी कॉमेडियन टुनटुन एक बार बिहार के सासाराम आए थे तो उन्होंने कवि कुमार को देखते ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वह एक्टर बनेंगे. यह बात बाद में सच साबित हुई. कवि आजाद ने दिल्ली के मंडी हाउस में कई साल थिएटर करने के बाद 1994 में मुंबई गए. आर्थिक तंगी होने के कारण वे शुरूआती छह महीने मुम्बई के जुहू बीच पर गुजारे. वे वहां पर छोटे-मोटे रोल करते रहे साथ ही थिएटर जगत से जुड़े रहे.

एक अखबार को दिए हुए इन्टरव्यू में कवि आजाद ने बताया है कि, “एक दिन एक नाटक की रिहर्सल में मुझे किसी ने देखा और कहा, ‘आप को हमारे बॉस ने बुलाया है’ शो से बुलावा आ गया. वहां से जिंदगी ने अच्छा मोड़ लेना शुरू किया. हालात ठीक होने की राह पर मुड़ा, पर उसे लंबी दूरी तय करनी पड़ी. एक दशक लगे मुझे ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ तक पहुंचने में. मैंने तब तक इंतजार किया. मेरा वजन मेरे लिए वरदान भी बना. मेरी जिंदगी दिशाहीन भी रही. तनाव में मैंने शराब पीना भी शुरू कर दिया था. डायरेक्टर असित कुमार मोदी को मुझ में उनका डॉक्टर हाथी दिख गया. हालांकि तब तक शो के 70 या 80 एपिसोड हो चुके थे. कोई और कलाकार उस रोल को निभा रहे थे. मुझे बुरा भी लगा कि, मैं कहीं किसी और की रोजी-रोटी तो नहीं छीन रहा. पर प्रॉडक्शन वालों ने मुझे कहा कि उस कलाकार के साथ अहम का टकराव चल रहा है. लिहाजा मैंने मना किया कि तो किसी और को कास्ट कर लिया जाएगा. इस पर मैंने हामी भर दी.”

मालूम हो कि कवि कुमार आजाद बॉलीवुड में भी हाथ आजमा चुके थे. साल 2000 में उन्हें फिल्म मेला में सुपरस्टार आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला. हालांकि कवि कुमार आजाद को असली पहचान ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से मिली.

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