आस्था: बेहद प्राचीन है मां अस्कामनी मंदिर, बिक्रमगंज व आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए है आस्था का केंद्र

0
4170

रोहतास जिला के बिक्रमगंज में मां अस्कामिनी का मंदिर बेहद प्राचीन है। मां अस्कामनी मंदिर बिक्रमगंज के आसपास के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ दूरदराज के श्रद्धालु यहां पूजा-पाठ के लिए आते हैं। पूजा आरती के समय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। सप्ताह के सोमवार व शुक्रवार को यहां विशेष पूजा होती है। जिसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। यहां प्रतिवर्ष सैकड़ों शादियां भी होती हैं। नवरात्री में यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

मंदिर का इतिहास :

बिक्रमगंज के डेहरी रोड स्थित मां अस्कामिनी मंदिर लगभग दो सौ वर्ष पुराना है। पहले यहां छोटा पेड़ था, जो धारुपुर निवासी चोआ पांडेय के जमीन में था, बाद में उनके पुत्र लक्ष्मण पांडेय ने यहां मंदिर के लिए 36 डिसमिल जमीन दान दे दिया। अब यहां मंदिर भव्य रूप ले लिया है।

कहा जाता है कि लगभग दो सौ वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में अस्कामनी मां थीं, जो लोगों का कल्याण करती थीं। लोगों का कहना है कि भूमिदाता को स्वपन में मां अस्कामिनी की प्रेरणा के बाद ही यहां भव्य मंदिर का निर्माण हुआ था।

लोगो के मुताबिक पूर्व में यहां श्रद्धालु बलि देते थे। लेकिन मंदिर के नए भवन निर्माण के बाद संत श्री लक्ष्मीप्रपन्न जियर स्वामी जी महराज के कहने के बाद यह परम्परा यहां समाप्त हो गई। अब यहां नारियल प्रसाद चढ़ाया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here