ऐतिहासिक महत्व का क्षेत्र है काराकाट लोकसभा क्षेत्र, दो भाषाओं का करता है प्रतिनिधित्व

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2009 के परिसीमन के बाद 46 वर्ष बाद बिक्रमगंज लोकसभा क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो गया. इसके बाद काराकाट नया संसदीय क्षेत्र बना. बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र तथा बिक्रमगंज विधानसभा क्षेत्र का वजूद समाप्त हो गया. काराकाट संसदीय क्षेत्र में औरंगाबाद जिला के गोह, नवीनगर और ओबरा तथा रोहतास जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों को नोखा, डेहरी और काराकाट को इस संसदीय क्षेत्र में शामिल किया गया. नए परिसीमन में बिक्रमगंज विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र का नाम बदल गया. पुराने बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र में बिक्रमगंज, दिनारा, नोखा, काराकाट, डेहरी और भोजपुर जिले के पीरो विधानसभा क्षेत्र शामिल थे. बिक्रमगंज विधानसभा क्षेत्र को काराकाट से जोड़ दिया गया.

इस संसदीय क्षेत्र के नाम को बदलने को लेकर लोगों ने, समाजिक संगठनों ने आंदोलन भी किया था. उस समय कहा गया कि बिक्रमगंज का नाम नहीं बदलेगा, लेकिन नाम बदल गया. इस संसदीय क्षेत्र के भूगोल के बदलने के कारण सामाजिक समीकरणों में भारी भी परिवर्तन हो गई. भोजपुरी भाषा और औरगाबाद जिले के मगही भाषा का भी अंतर आ गया. दुरी भी बढ़ गई. उस समय नासरीगंज एवं दाऊद नगर का पुल भी नही बना था. बिक्रमगंज से 2004 के चुनाव में जदयू के अजीत कुमार सिंह ने राजद के राम प्रसाद सिंह को 58801 मतों से पराजित किया. बाद में अजीत सिंह की सड़क दुर्घटना में निधन के बाद 2008 में हुए उप चुनाव में अजीत सिंह की पत्नी मीना सिंह चुनी गई.

नवनिर्मित नासरीगंज-दाऊद नगर ब्रिज

काराकाट का है ऐतिहासिक महत्व : काराकाट में देवमार्कण्डेय गांव में एक प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है. काराकाट नामक एक गांव है. जिसके नाम पर ही काराकाट प्रखंड मुख्यालय बना. जो अब लोकसभा क्षेत्र बन गया. जिसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हो गई. काराकाट में प्रखंड कार्यालय नहीं है, बल्कि गोड़ारी में है. प्रखंड मुख्यालय के पूर्व में तरारी प्रखंड है. पश्चिम में राजपुर व संझौली है. उत्तर में बिक्रमंगज व दक्षिण में नासरीगंज प्रखंड स्थित है. यह प्रखंड 20 पंचायतों का है.

देवमार्कण्डेय स्थित सूर्यमंदिर

काराकाट संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1569989 है. जिसमें पुरुष 845707, महिला 724282 व थर्ड जेंडर की संख्या 68 है. काराकाट संसदीय क्षेत्र इंद्रपुरी बराज से ही शुरू हो जाता है और यह दनवार बिहटा में सामाप्त हो जाता है. उसके बाद नवीनगर विधानसभा क्षेत्र पड़ता है, सोन के दूसरी तरफ औरंगाबाद का ओबरा विधानसभा क्षेत्र आता है. ओबरा कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है. ओबरा विधानसभा क्षेत्र का दाउदनगर ऐतिहासिक स्थान है. दाउद खां औरंगजेब के सिपहसलार थे. उन्हीं के नाम पर दाउदनगर बना. यहां दाउद खां का किला है. सचिवालय गोलीकांड के नायकों में शहीद हुए जगतपति कुमार ओबरा के निकट खरांटी गांव के थे.

दाउद खां का किला

काराकाट संसदीय क्षेत्र में नोखा विधानसभा क्षेत्र के नासरीगंज, राजपुर और नोखा प्रखंड पड़ता है. नोखा भी एतिहासिक जगह है. कुंवर सिंह ने यहाँ के सैनिको को लेकर अंग्रजो के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी. डेहरी विधानसभा क्षेत्र के अकोढ़ीगोला और डेहरी प्रखंड शामिल हैं. काराकाट विधानसभा क्षेत्र में बिक्रमगंज, काराकाट और संझौली प्रखंड है. गोह विधानसभा के गोह हसपुरा और गोह प्रखंड, रफीगंज प्रखंड के पौथू ईटार, लट्टा और सिहुली ग्राम पंचायतें शामिल हैं. ओबरा विधानसभा के ओबरा और दाउदनगर प्रखंड  शामिल हैं. नवीनगर विधानसभा क्षेत्र के बारुण प्रखंड, नवीननगर प्रखंड के महुऑव, अंकोरहा, सोनोरा, राजपुर, चन्द्रगढ़, बैरिया, सिमरी धमनी, कंकेर, केरका, मझिऑवा, नाऊर, बेलाई, पीपरा, ठेंगनी और तोल ग्राम पंचायतें और नवीनगर (एन.ए) शामिल हैं.

बिक्रमगंज से काराकाट जाने वाली सड़क

बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र से कमल सिंह, रामसुभग सिंह, शिवपूजन सिंह, रामअवधेश सिंह, तपेश्वर सिंह, रामप्रसाद सिंह, कांति सिंह, वशिष्ठ नारायण सिंह, अजीत सिंह एवं मीना सिह सांसद रहे. काराकाट से प्रथम सांसद महाबली सिह चुने गये, वही 20014 में भाजपा गठबंधन के रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा चुने गये. इस बार रालोसपा राजद गठबंधन के साथ उपेन्द्र कुशवाहा एवं भाजपा गठबंधन से जदयु के प्रत्यासी महाबली सिंह की घोषणा की गई है. चुनाव 19 मई को होगी. अब देखना है कि कौन काराकाट का प्रतिनिधित्व करता है.

रिपोर्ट- अरविन्द कुमार सिंह

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